शारदीय नवरात्रि 2026: घटस्थापना, नौ देवियाँ और दशहरा 20 अक्टूबर को
शारदीय नवरात्रि 11 से 19 अक्टूबर 2026, दशहरा 20 अक्टूबर। घटस्थापना मुहूर्त सुबह 7:12 से 9:00 तक। नौ दिनों की पूरी जानकारी।
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- Hindi
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आज रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रही है। नौ रातों का यह पर्व सोमवार, 19 अक्टूबर को महानवमी पर पूरा होगा और मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाएगी। नीचे के समय दिल्ली के लिए हैं। अपने शहर के अनुसार कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। स्रोत लेख के अंत में दिए गए हैं।
Photo: Kaushlendrapathe, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons
घटस्थापना
प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर को सुबह 8:49 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर को सुबह 9:00 बजे तक है। घटस्थापना का मुहूर्त आज सुबह 7:12 से 9:00 बजे तक, यानी 1 घंटा 48 मिनट का है। इसी समय कलश स्थापित किया जाता है, जो नौ दिन घर के पूजा-स्थान में रहता है।
सामान्यतः साफ़ मिट्टी में जौ बोकर उस पर जल से भरा कलश रखा जाता है। कलश पर आम के पत्ते और नारियल रखते हैं और पास में दीपक जलाते हैं। नौ दिनों में जौ के अंकुर निकलते हैं, जिन्हें कई परिवार शुभ संकेत मानते हैं। मुहूर्त निकल जाए तो अपने पंडित जी या स्थानीय मंदिर से सलाह लें।
नौ दिन, नौ स्वरूप
11 अक्टूबर: शैलपुत्री (घटस्थापना)
12 अक्टूबर: ब्रह्मचारिणी
13 अक्टूबर: चंद्रघंटा
14 अक्टूबर: कूष्मांडा
15 अक्टूबर: स्कंदमाता
16 अक्टूबर: कात्यायनी
17 अक्टूबर: कालरात्रि
18 अक्टूबर: महागौरी, दुर्गा अष्टमी। संधि पूजा रात 9:57 से 10:45 बजे तक।
19 अक्टूबर: सिद्धिदात्री, महानवमी, आयुध पूजा और नवमी हवन
हर दिन देवी के एक स्वरूप की पूजा होती है। कई परिवार हर दिन का एक रंग भी पहनते हैं, पर रंगों की सूची क्षेत्र और परंपरा के अनुसार बदलती है, इसलिए अपने घर की परंपरा ही मानें।
Photo: Ashish Suryavanshi858, CC0, via Wikimedia Commons
व्रत कैसे रखें
हर परिवार की अपनी परंपरा है। कोई नौ दिन व्रत रखता है, कोई पहला और आखिरी, कोई केवल अष्टमी। कुट्टू, सिंघाड़ा, साबूदाना, फल, दूध और सेंधा नमक आम व्रत-आहार हैं।
पानी पर्याप्त पिएँ और समय पर भोजन करें। व्रत अनुशासन है, सहनशक्ति की परीक्षा नहीं।
खाली पेट बहुत तला हुआ भोजन न करें; थोड़े मेवे या फल दिन को संतुलित रखते हैं।
यह सामान्य जानकारी है, चिकित्सकीय सलाह नहीं। गर्भवती, बुजुर्ग, मधुमेह के रोगी या दवा लेने वाले लोग व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
कन्या पूजन
अष्टमी या नवमी पर कन्याओं को घर बुलाकर हलवा, पूरी और चने का भोजन कराने, उन्हें छोटे उपहार देने और उनका आशीर्वाद लेने की परंपरा है। यह दिन बच्चों और बेटियों के प्रति सम्मान और स्नेह का भी है।
Photo: Blvrsngh80540, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons
दशहरा, 20 अक्टूबर
विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 से 2:45 बजे तक और अपराह्न पूजा का समय 1:14 से 3:30 बजे तक है। दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 से शुरू होकर 21 अक्टूबर को 2:11 बजे तक है। बंगाल में विजयादशमी 21 अक्टूबर को है। रावण दहन आमतौर पर शाम को स्थानीय समिति तय करती है। उत्तर भारत में रामलीला के मंचन के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं।
नौ दिन को सरल रखें
सुबह दस मिनट जप, शाम को एक दीपक, और किसी स्थानीय मंदिर का दर्शन। किसी अकेले व्यक्ति के साथ प्रसाद बाँटना भी इन दिनों का सुंदर तरीका है। जो लोग शांत दिनचर्या चाहते हैं, वे wellness.dharmikvibes.com पर हमारे नोट्स देख सकते हैं।
देवी धामों की यात्रा
देवी धामों और शक्तिपीठों की यात्रा के लिए यह मौसम लोकप्रिय है। अष्टमी और नवमी पर भीड़ बहुत रहती है, इसलिए पहले से योजना बनाएँ, जल्दी पहुँचें, पानी साथ रखें और मंदिर प्रशासन की सूचनाओं का पालन करें। दिव्य अनुभवों के लिए dharmikvibes.com देखें।
संक्षेप में
घटस्थापना कब है? आज, 11 अक्टूबर, सुबह 7:12 से 9:00 बजे तक (दिल्ली)। दुर्गा अष्टमी कब है? 18 अक्टूबर। महानवमी कब है? 19 अक्टूबर। दशहरा कब है? मंगलवार, 20 अक्टूबर।