दिवाली 2026: पाँच दिन, पाँच अर्थ
धनतेरस से भाई दूज तक संपूर्ण मार्गदर्शिका
दिवाली एक दिन का नहीं, पाँच दिनों का पर्व है। हर दिन की अपनी कथा, अपनी विधि और अपना अर्थ है। यहाँ हिंदू पंचांग के अनुसार 2026 की तिथियाँ और हर दिन का सरल मार्गदर्शन दिया गया है। पूजा के शुभ मुहूर्त शहर के अनुसार बदलते हैं, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य कर लें।
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- Hindi
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दिवाली एक दिन का नहीं, पाँच दिनों का पर्व है। हर दिन की अपनी कथा, अपनी विधि और अपना अर्थ है। यहाँ हिंदू पंचांग के अनुसार 2026 की तिथियाँ और हर दिन का सरल मार्गदर्शन दिया गया है। पूजा के शुभ मुहूर्त शहर के अनुसार बदलते हैं, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य कर लें।
पाँच दिनों की तिथियाँ (2026)
धनतेरस: शुक्रवार, 6 नवंबर
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): शनिवार, 7 नवंबर
लक्ष्मी पूजा, मुख्य दिवाली: रविवार, 8 नवंबर
गोवर्धन पूजा: सोमवार, 9 नवंबर (गुजराती नव वर्ष, बेसतु वरस भी)
भाई दूज: मंगलवार, 10 नवंबर
धनतेरस: आरोग्य और समृद्धि का निमंत्रण
यह दिन समुद्र मंथन से अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि को समर्पित है। घर में किसी नई धातु की वस्तु की खरीद की जाती है, जो केवल खरीदारी नहीं बल्कि घर में नया आशीर्वाद लाने का प्रतीक है। संध्या में यमराज के निमित्त दक्षिण दिशा में तेरह दीपक जलाए जाते हैं। घर की सफाई और अनावश्यक वस्तुओं को हटाने का काम भी आज से ही शुरू हो जाता है।
नरक चतुर्दशी: विजय की ब्रह्ममुहूर्त वाली सुबह
छोटी दिवाली भगवान कृष्ण और सत्यभामा द्वारा नरकासुर के वध की कथा से जुड़ी है। इस दिन सूर्योदय से पहले तेल से अभ्यंग कर गर्म जल से स्नान की परंपरा है, जो वर्षभर की थकान और नकारात्मकता को धोने का प्रतीक है।
लक्ष्मी पूजा: वर्ष की सबसे उज्ज्वल अमावस्या
कार्तिक अमावस्या की सबसे अंधेरी रात को भारत प्रकाश से उत्तर देता है। प्रदोष काल में लक्ष्मी और गणेश की पूजा होती है, द्वार खुले रखे जाते हैं और हर खिड़की-आंगन दीयों से जगमगाता है। व्यापारी चोपड़ा पूजन कर नई बही खाते हैं और पूजा के बाद पूरा परिवार साथ भोजन करता है।
गोवर्धन पूजा: प्रकृति के प्रति कृतज्ञता
इंद्र के कोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया था। संदेश स्पष्ट है: प्रकृति उनकी रक्षा करती है जो प्रकृति की रक्षा करते हैं। अन्नकूट के रूप में अनेक व्यंजन अर्पित कर बाद में प्रसाद बाँटा जाता है।
भाई दूज: भाई-बहन का बंधन
पर्व का समापन भाई-बहन के प्रेम से होता है। बहनें भाई के मस्तक पर तिलक कर आरती उतारती हैं और भाई उपहार के साथ रक्षा का वचन देते हैं। यम और यमुना की कथा के कारण इस दिन बहन के घर भोजन करना शुभ माना जाता है।
एक ही सूत्र
पाँचों दिन मिलकर एक क्रम बनाते हैं: समृद्धि का आह्वान, स्वयं की शुद्धि, देवी का स्वागत, प्रकृति को धन्यवाद और परिवार का सम्मान। दीपक प्रतीक है, पर असली अर्थ है नवीकरण, घर, शरीर और मन का।
चित्र: दिवाली का दीया, विकीमीडिया कॉमन्स (CC BY 2.0)