काशी विश्वनाथ 5 मिनट में: अविमुक्त, ज्योतिर्लिंग, विश्वनाथ 5 मिनट में काशी विश्वनाथ: तीन नाम जो जानने चाहिए

लोग क्यों कहते हैं कि शिव काशी को कभी नहीं छोड़ते? पुराण इस नगरी को एक ऐसा नाम देते हैं जिसमें इसका उत्तर छिपा है।

Narrated with an AI voice.

By
DharmikStudio Originals
Language
Hindi
Length
3 min
Category
History, heritage & culture › Temples
Temple or tirtha
Kashi Vishwanath Temple
Narration
AI voice

The article

अगर कोई पूछे कि लोग क्यों कहते हैं कि शिव काशी को कभी नहीं छोड़ते, तो उत्तर नगरी के नामों में ही छिपा है। पाँच मिनट में तीन नाम समझते हैं। हर नाम से यह समझ आता है कि काशी को इतने लंबे समय से किस तरह देखा गया है।

### 1. अविमुक्त: वह स्थान जिसे कभी छोड़ा नहीं जाता स्कंद पुराण के काशी खण्ड में काशी को *अविमुक्त* कहा गया है। इसका अर्थ है "जिसे छोड़ा न गया हो"। पुराण इससे यह कहता है कि शिव इस नगरी को नहीं छोड़ते, और यहाँ आने वाले उनकी छाया में रहते हैं। इसी ग्रंथ में काशी को *आनंदवन* भी कहा गया है, यानी आनंद का वन। इसमें मणिकर्णिका और दशाश्वमेध जैसे उन स्थानों के नाम भी आते हैं जिनका यात्री आदर करते हैं।

हर बात को वैसे ही मानना ज़रूरी नहीं, पर नाम का भाव साफ़ है: काशी अपनेपन की जगह है, जहाँ आने वाले को स्वागत महसूस होना चाहिए।

### 2. ज्योतिर्लिंग: प्रकाश का स्तंभ शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता में एक विशाल प्रकाश-स्तंभ की कथा है, जो ब्रह्मा और विष्णु के सामने प्रकट हुआ। उसका न आदि मिला, न अंत। कथा सिखाती है कि निराकार शिव प्रकाश के रूप में प्रकट होते हैं, और जहाँ उस प्रकाश की उपासना होती है, उन स्थानों को *ज्योतिर्लिंग* कहते हैं।

कोटिरुद्र संहिता में बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची है, और वाराणसी उनमें एक है। आदि शंकराचार्य के नाम से जाने जाने वाले द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र की एक पंक्ति यही कहती है: "वाराणस्यां तु विश्वेशं"। कोटिरुद्र संहिता में विश्वेश्वर पर अलग अध्याय भी हैं।

### 3. विश्वनाथ: विश्व के स्वामी *विश्व* का अर्थ है पूरा जगत और *नाथ* का अर्थ है स्वामी। विश्वनाथ, यानी विश्वेश्वर, वे शिव हैं जो सबके स्वामी हैं, किसी एक वर्ग, जाति या देश के नहीं। इसी कारण हर प्रदेश के लोग इस एक स्थान तक पैदल चलकर आते रहे हैं।

आज का मंदिर 1780 में इंदौर की अहिल्याबाई होलकर ने बनवाया। उसके शिखर पर चढ़ा सोना महाराजा रणजीत सिंह ने दिया। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास अपने इतिहास और आरती की समय-सारणी स्वयं प्रकाशित करता है; यात्रा की योजना बनाने वाले वहीं से जानकारी लें।

### तीनों को साथ रखें अविमुक्त बताता है कि शिव यहीं रहते हैं। ज्योतिर्लिंग बताता है कि वे क्या हैं: प्रकाश। विश्वनाथ बताता है कि वे किसके हैं: सबके। इन तीनों से समझ आता है कि इस नगरी को इतना प्रिय क्यों माना जाता है।

### अभ्यास एक पंक्ति अर्थ के साथ सीखें: "वाराणस्यां तु विश्वेशं", यानी वाराणसी में विश्वेश। उच्चारण किसी जानकार व्यक्ति से या अच्छी रिकॉर्डिंग से सीखें, फिर उसे एक बार धीरे-धीरे बोलें और अर्थ मन में रखें।

### खुद को जाँचिए 1. अविमुक्त का क्या अर्थ है? (जिसे छोड़ा न गया हो, वह स्थान जिसे शिव नहीं छोड़ते।) 2. बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची किस पुराण में है? (शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता में।) 3. आज का मंदिर किसने और कब बनवाया? (अहिल्याबाई होलकर ने, 1780 में।)

**स्रोत:** स्कंद पुराण, काशी खण्ड (गीता प्रेस, गोरखपुर, हिंदी अनुवाद; भावार्थ डीवी का अपना); शिव पुराण, विद्येश्वर संहिता (प्रकाश-स्तंभ); शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता (बारह ज्योतिर्लिंग; विश्वेश्वर); द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (परंपरागत, आदि शंकराचार्य के नाम से); श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास, प्रकाशित इतिहास और आरती-सारणी।

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