काशी के घाटों पर सम्मान से: 7 बातें

पहली रोशनी में गंगा के किनारे-किनारे अस्सी से मणिकर्णिका तक उत्तर की ओर चलिए, और सुनिए कि हर घाट क्या याद रखता है।

Narrated with an AI voice.

By
DharmikStudio Originals
Language
Hindi
Length
2 min
Category
History, heritage & culture › Tirthas
Temple or tirtha
Kashi Vishwanath Temple
Narration
AI voice

The article

काशी के घाट कोई दर्शनीय स्थल भर नहीं हैं। ये वे सीढ़ियाँ हैं जहाँ लोग स्नान करते हैं, पूजा करते हैं, अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करते हैं और अपना दिन शुरू करते हैं। इन्हें वैसे ही देखें जैसे किसी के पूजा-घर में प्रवेश करते हैं। ये सात बातें मदद करेंगी।

### 1. भोर में जाएँ घाट पूर्व की ओर, गंगा के पार उगते सूरज की ओर हैं। सूर्योदय से पहले पहुँचें और नदी के साथ-साथ धीरे चलें, दक्षिण में अस्सी घाट से दशाश्वमेध और आगे तक। उस समय सीढ़ियाँ शांत होती हैं, रोशनी कोमल होती है, और आप काशी को काम में नहीं, प्रार्थना में देखते हैं। पकड़ वाले जूते पहनें: पत्थर अक्सर गीला और घिसा हुआ होता है।

### 2. चाहें तो सूर्य को जल अर्पित करें बहुत से लोग सूर्योदय पर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। सूर्य की ओर मुख करके खड़े हों, जल का छोटा पात्र (परंपरा से ताँबे का लोटा) छाती की ऊँचाई पर रखें, और "ॐ सूर्याय नमः" कहते हुए धीरे-धीरे जल अर्पित करें। गिरते जल में से आती रोशनी को एक पल देखें। यह अर्पण है, दिखावा नहीं।

### 3. नाव की सवारी भोर की नाव, या दशाश्वमेध पर शाम की गंगा आरती, काशी का उपहार है। पंजीकृत नाविक चुनें, चढ़ने से पहले किराया और रास्ता तय कर लें, और लाइफ जैकेट पहनें। नाव चलते समय बैठे रहें। शाम की आरती के लिए जल्दी पहुँचें और बैठे रहें ताकि दूसरे भी देख सकें।

### 4. श्मशान घाट: सम्मानजनक दूरी रखें मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर परिवार अपने प्रियजन को विदा कर रहे होते हैं। दूरी रखें, आवाज़ धीमी रखें, और फ़ोटो या वीडियो न लें। श्मशान का पैसे वाला "टूर" कराने या लकड़ी के नाम पर पैसे माँगने वालों को विनम्रता से मना करें; ये संस्कार परिवार और घाट के अपने लोग सँभालते हैं।

### 5. गंगा को स्वच्छ रखें पानी तक प्लास्टिक न ले जाएँ और अपना कचरा साथ वापस लाएँ। नदी में साबुन या शैम्पू का प्रयोग न करें। फूल या दीया अर्पित करें तो छोटा रखें, और जहाँ अर्पण के लिए जगह तय हो, वहीं करें।

### 6. वेशभूषा और जूते शालीन कपड़े पहनें, कंधे और घुटने ढके हों। घाट पर किसी भी मंदिर में जाने से पहले जूते उतारें और जहाँ कहा जाए वहीं रखें। बरसात (जुलाई से सितंबर) में नदी चढ़ जाती है और नीचे की कुछ सीढ़ियाँ डूब जाती हैं; किनारे से दूर रहें और स्थानीय निर्देश मानें।

### 7. प्रार्थना करते लोग साधु, पंडित और परिवार घाट पर प्रार्थना करने आते हैं, फ़ोटो खिंचवाने नहीं। तस्वीर लेने से पहले पूछें, और "ना" को स्वीकार करें। आशीर्वाद के लिए पैसे देना कभी ज़रूरी नहीं; मन हो तो दक्षिणा चुपचाप और स्वेच्छा से दें।

### अभ्यास नदी से लौटने से पहले एक साँस भर रुकें, सुबह की रोशनी की ओर मुख करें, और धन्यवाद कहें: नदी के लिए, नगरी के लिए, और यहाँ होने के अवसर के लिए।

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