दीपावली पर घर में लक्ष्मी-गणेश पूजा कैसे करें

8 नवंबर 2026 की शाम के लिए सरल विधि, हर घर के लिए विकल्पों के साथ

दीपावली, रविवार 8 नवंबर 2026 की शाम घर पर लक्ष्मी-गणेश पूजा की सरल विधि: चौकी और कलश कैसे सजाएँ, पहले गणेश जी, फिर कलश और लक्ष्मी जी की पूजा, आरती, घर के दीये और प्रसाद। साथ में विकल्प उनके लिए जिनके पास मूर्ति, पुरोहित, समय या सामग्री नहीं, जो घर से दूर हैं, या फ़्लैट में खुली लौ नहीं जला सकते। इस वर्ष नरक चतुर्दशी भी इसी दिन है। बंगाल की काली पूजा, गुजरात का चोपड़ा पूजन, महाराष्ट्र और दक्षिण की रीतियाँ भी। मुहूर्त का समय अपने शहर के पंचांग से देखें। क्या आपके घर में कोई ख़ास रीति है?

By
DharmikVibes
Language
Hindi
Length
5 min
Category
How-to › Puja vidhi

The article

दीपावली की शाम घर पर लक्ष्मी-गणेश पूजा की सरल विधि: क्या-क्या रखें, पूजा किस क्रम में करें, कुछ न हो तो क्या करें, और भारत भर के परिवार यह शाम कैसे मनाते हैं। यह उनके लिए है जो पहली बार ख़ुद पूजा कर रहे हैं, घर पर या घर से दूर।

दीपावली, लक्ष्मी पूजा की रात, रविवार 8 नवंबर 2026 को है (द्रिक पंचांग, नई दिल्ली; जाँचे गए आठों शहरों में यही तिथि, भारत सरकार की अवकाश सूची से मिलान)। इस वर्ष नरक चतुर्दशी भी इसी दिन है, इसलिए नरक चतुर्दशी का सुबह का स्नान और शाम की लक्ष्मी पूजा, दोनों 8 नवंबर को होंगे। पूजा शाम को, सूर्यास्त के बाद होती है। हर परिवार अपने शहर का सही समय पंचांग से या अपने पुरोहित से देखता है, प्रायः प्रदोष काल या शाम के स्थिर लग्न में। हम यहाँ समय नहीं दे रहे, क्योंकि वह हर शहर में बदलता है।

**क्या चाहिए**

- एक साफ़ चौकी या छोटी मेज़, लाल या पीले कपड़े के साथ - लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति या चित्र; बहुत से परिवार हर साल मिट्टी की नई जोड़ी लाते हैं - कलश: ताँबे या पीतल का लोटा, पानी, आम के पत्ते और ऊपर नारियल, मौली बँधी हुई - रोली, हल्दी, अक्षत (चावल), चंदन, मौली, धूप और कपूर - ताज़े फूल और माला; मिले तो कमल - खील-बताशे, मिठाई, फल, पान, सुपारी और लौंग - कुछ सिक्के, और अगर आप हिसाब रखते हैं तो नई बही या डायरी - पूजा के लिए एक बड़ा दीया, और घर के लिए जितने चाहें छोटे दीये, घी या तेल के साथ - दरवाज़े की रंगोली के लिए रंग या चावल का आटा

**विधि**

1. **घर और पूजा स्थान साफ़ करें।** बहुत से परिवार दीपावली से कई दिन पहले सफ़ाई करते हैं। उस शाम स्नान करें, साफ़ कपड़े पहनें, और पूजा का कोना पोंछ लें। 2. **दरवाज़े पर रंगोली बनाएँ** और दोनों ओर एक-एक दीया रखें। लक्ष्मी जी का स्वागत साफ़ और रोशन घर में होता है। 3. **चौकी सजाएँ।** लक्ष्मी जी और गणेश जी को साथ-साथ रखें, जैसे आपके परिवार में रखा जाता है। पास में कलश, और सामने बड़ा दीया रखें। 4. **बड़ा दीया जलाएँ** और संकल्प लें। हाथ में जल, अक्षत और एक फूल लेकर मन में कहें: मैं अपने परिवार के साथ इस दीपावली पर श्रद्धा से लक्ष्मी-गणेश पूजा करता/करती हूँ। जल चौकी के पास छोड़ दें। 5. **पहले गणेश जी की पूजा करें।** रोली, अक्षत, एक फूल और मिठाई अर्पित करें। हर पूजा उन्हीं से शुरू होती है। 6. **कलश की पूजा करें।** कलश पर मौली, चंदन और एक फूल। 7. **लक्ष्मी जी की पूजा करें।** जल छिड़कें, फिर रोली, हल्दी, अक्षत, फूल, माला, खील-बताशे, मिठाई और फल अर्पित करें। सिक्के और बही उनके सामने रखें। बहुत से घरों में यहीं कुबेर जी को भी याद किया जाता है। मन में लक्ष्मी जी का नाम रखें। 8. **आरती करें।** परिवार जो लक्ष्मी आरती जानता है, वह गाए, या दीया लेकर शांत बैठें। दीया घुमाएँ, फिर कपूर जलाएँ। 9. **घर के दीये जलाएँ।** पूजा के दीये से लौ लेकर दरवाज़े, खिड़कियों, रसोई, पानी के घड़े और तुलसी के पास दीये जलाएँ। 10. **प्रसाद बाँटें,** घर के सब लोगों में, और हो सके तो किसी पड़ोसी को भी।

**अगर यह न हो सके…**

- **मूर्ति या चित्र न हो:** एक जलते दीये और साफ़ कलश के सामने बैठ जाइए। दीया और सच्चा मन काफ़ी है। - **पुरोहित न हों:** इस पूजा के लिए ज़रूरी नहीं। परिवार का कोई भी सदस्य कर सकता है। - **समय या सामग्री कम हो:** एक दीया, एक फूल, एक मिठाई और गणेश जी व लक्ष्मी जी के नाम के साथ कुछ शांत मिनट, यह पूरी पूजा है। - **घर से दूर या अकेले हों:** जहाँ हैं, वहीं पूजा करें, और आरती के समय परिवार से वीडियो कॉल पर जुड़ जाइए। - **फ़्लैट में खुली लौ की अनुमति न हो:** बिजली के दीये या रोशनी लगाइए। - **बुज़ुर्ग, बीमार, या जो ज़मीन पर न बैठ सकें:** कुर्सी पर बैठिए। आराम से पूजा का कुछ नहीं घटता। - **अगर पूजा तक व्रत रखते हैं:** यह पारिवारिक रीति है, सबके लिए नियम नहीं। गर्भवती महिलाएँ, मधुमेह के रोगी, बुज़ुर्ग और जो दवा लेते हैं, वे डॉक्टर की सलाह से भोजन करें; डॉक्टर की दी हुई दवा लेने से व्रत नहीं टूटता। - **सावधानी:** दीये पर्दों और बच्चों के कपड़ों से दूर रखें, और कोई दीया ऐसी जगह जलता न छोड़ें जहाँ कोई जागकर देख न रहा हो।

**हर क्षेत्र की अपनी रीति**

बंगाल, ओडिशा और असम में यही रात काली पूजा की है, और लक्ष्मी जी की पूजा पहले, कोजागरी पूर्णिमा पर होती है। गुजरात में व्यापारी चोपड़ा पूजन में नई बही की पूजा करते हैं, और कुछ ही समय बाद नया वर्ष शुरू होता है। महाराष्ट्र में लक्ष्मी पूजन दीपावली का केंद्र है, और बहुत से घरों में झाड़ू को भी लक्ष्मी का रूप मानकर पूजा जाता है। तमिलनाडु और दक्षिण के बड़े हिस्से में दीपावली नरक चतुर्दशी की सुबह है, भोर से पहले तेल स्नान के साथ। उत्तर में दीपावली को वह रात भी माना जाता है जब अयोध्या ने राम जी का स्वागत किया। ये सब रीतियाँ समान रूप से सही हैं।

**हम यह क्यों करते हैं**

लक्ष्मी जी समृद्धि, सुंदरता और सुव्यवस्था की देवी हैं, और गणेश जी विघ्न हरते हैं और हर शुरुआत में पहले पूजे जाते हैं। दीपावली कार्तिक की अमावस्या को आती है, महीने की सबसे अँधेरी रात, और घर उस अँधेरे के सामने दीयों से भर दिया जाता है। बही, औज़ार और सिक्के लक्ष्मी जी के सामने इसलिए रखे जाते हैं कि साल भर के काम के लिए धन्यवाद दें और आने वाले साल में स्थिरता माँगें। दीपावली और राम जी के अयोध्या लौटने का संबंध बाद की परंपरा से आता है, और बहुत से परिवारों को बहुत प्रिय है।

**स्रोत**

- विधि घरों में प्रचलित सामान्य रीति पर आधारित है; हर परिवार अपनी परंपरा और अपने पुरोहित की सलाह मानें। - केवल मिलान के लिए: DharmikVibes, *The Complete Handbook of Hindu Pujas, Temples and Rituals* (DV की अपनी पुस्तक) - तिथि: DharmikVibes त्योहार कैलेंडर (द्रिक पंचांग, नई दिल्ली, जाँचे गए आठों शहरों में यही; 2026 के लिए DoPT अवकाश आदेश से मिलान), 30 सितंबर 2026 को पढ़ा गया

*परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार बदलती हैं। संदेह हो तो अपने बड़ों, अपने पुरोहित और अपने डॉक्टर की बात मानें।*

More