गणेश जी से शुरुआत: किसी भी काम से पहले एक मिनट
लगभग हर शुभ काम गणेश जी की वंदना से शुरू होता है। ऐसा क्यों, और उनके रूप का हर अंग क्या सिखाता है।
Narrated with an AI voice.
- By
- DharmikStudio Originals
- Language
- Hindi
- Length
- 3 min
- Category
- Vedas, shastra & Sanskrit › Shastra study
- Narration
- AI voice
The article
लगभग हर शुभ काम, विवाह से लेकर नई दुकान तक, गणेश जी की वंदना से शुरू होता है। यह आदत रोज़ के काम के लिए भी अपनाने लायक है। हम उनसे शुरुआत क्यों करते हैं, एक छोटा मंत्र, और एक मिनट का अभ्यास, यहाँ सब है।
### 1. गणेश जी से शुरुआत क्यों गणेश जी को विघ्नेश्वर, यानी बाधाओं के स्वामी, और गणपति, यानी गणों के स्वामी, कहा जाता है। परंपरा कहती है कि उन्हें पहले पूजा जाता है ताकि आने वाला काम साफ़ मन और विनम्रता से शुरू हो, जल्दबाज़ी या अहंकार से नहीं।
उन्हें बुलाने के लिए लोग जिस सबसे पुराने मंत्र का प्रयोग करते हैं, वह ऋग्वेद 2.23.1 है: "गणानां त्वा गणपतिं हवामहे"। ऋग्वेद में यह ब्रह्मणस्पति को संबोधित है, यानी प्रार्थना के स्वामी को, और आज यह गणेश-पूजन में बोला जाता है। दोनों बातें जानना अच्छा है, क्योंकि इससे दिखता है कि एक पुराना सूक्त बाद की भक्ति में कैसे नया घर पा गया।
### 2. कथाएँ शिव पुराण (रुद्र संहिता, कुमार खण्ड, अध्याय 13 से 20) में गणेश जी का पार्वती से जन्म, उनके गजमुख होने, और सबसे पहले पूजे जाने का वर मिलने की कथा है। एक जानी-पहचानी कथा में वे माता-पिता की परिक्रमा करके यह सम्मान पाते हैं, जिससे सीख मिलती है कि जिसने जीवन दिया उसका आदर पूरे संसार का आदर है। ब्रह्मवैवर्त पुराण (गणपति खण्ड) में उनके गजमुख होने की कथा अलग ढंग से कही गई है। पुराण अलग-अलग कथाएँ कहते हैं, और हर परिवार वही कथा रखता है जिसमें वह पला है।
महाभारत के आदि पर्व में, गीता प्रेस के संस्करण के अनुसार, गणेश जी व्यास के बोलने पर महाभारत लिखते हैं, इस शर्त पर कि व्यास रुकेंगे नहीं। बी.ओ.आर.आई. के समालोचनात्मक संस्करण में यह प्रसंग मुख्य पाठ के बाहर रखा गया है, इसलिए इसे सुनाते समय "कई संस्करणों में" कहना ठीक रहता है।
### 3. उनका रूप क्या सिखाता है शिक्षक इस रूप को लंबे समय से सीख की तरह पढ़ते आए हैं। ये अर्थ आम तौर पर बताए जाते हैं: - **बड़े कान:** बोलने से अधिक सुनें। - **छोटी आँखें:** एक बात को ध्यान से देखें। - **सूँड़, जो पेड़ भी उठा सकती है और सुई भी:** मज़बूत भी रहें, कोमल भी। - **टूटा हुआ दाँत:** किसी अच्छे काम के लिए अपना कुछ छोड़ना। - **छोटा-सा चूहा वाहन:** चंचल मन, जिसे साधा जा सकता है।
इन्हें निमंत्रण की तरह लें, नियमों की तरह नहीं।
### 4. मंत्र गणपति अथर्वशीर्ष गणेश जी को सबसे पहले पूजे जाने वाले के रूप में नमन करता है। आम छोटा मंत्र है "ॐ गं गणपतये नमः", जिसका अर्थ है "गणपति को नमस्कार"। *गं* वह बीज-ध्वनि है जो परंपरा में गणेश जी से जुड़ी है। उच्चारण किसी जानकार से या अच्छी रिकॉर्डिंग से सीखें, और पहले दिन पूरी तरह सही न बोल पाने की चिंता न करें।
### एक मिनट का अभ्यास 1. स्थिर होकर बैठिए या खड़े हो जाइए, और एक धीमी साँस लीजिए। 2. मंत्र तीन बार बोलिए, ज़ोर से या मन में। 3. जो काम शुरू करने जा रहे हैं उसका नाम एक वाक्य में लीजिए, जैसे: "मैं यह पत्र लिखने जा रहा हूँ।" 4. काम शुरू कीजिए।
बस यही अभ्यास है। इसमें एक मिनट लगता है, और रोज़ एक ही समय पर करने से सबसे अच्छा काम करता है।
### प्रश्न 1. गणपति का अर्थ क्या है? (गणों के स्वामी।) 2. गणेश जी के आवाहन में ऋग्वेद का कौन सा मंत्र बोला जाता है, और ऋग्वेद में वह किसे संबोधित है? (2.23.1, ब्रह्मणस्पति को।)
**स्रोत:** ऋग्वेद 2.23.1, कोई भी मानक संहिता पाठ; शिव पुराण, रुद्र संहिता, कुमार खण्ड, अध्याय 13-20 (गीता प्रेस, गोरखपुर); ब्रह्मवैवर्त पुराण, गणपति खण्ड; गणपति अथर्वशीर्ष (परंपरागत पाठ); महाभारत, आदि पर्व (गीता प्रेस संस्करण; बी.ओ.आर.आई. समालोचनात्मक संस्करण में मुख्य पाठ के बाहर)।