महाकालेश्वर, उज्जैन की पहली यात्रा से पहले: क्या जानें महाकालेश्वर की पहली यात्रा से पहले: क्या जानें
शिव पुराण बताता है कि अवंती के चार भाइयों ने कठिन समय में भी अपनी पूजा नहीं छोड़ी, और वहाँ शिव महाकाल क्यों कहलाए।
Narrated with an AI voice.
- By
- DharmikStudio Originals
- Language
- Hindi
- Length
- 3 min
- Category
- History, heritage & culture › Temples
- Temple or tirtha
- Mahakaleshwar Temple, Ujjain
- Narration
- AI voice
The article
उज्जैन का महाकालेश्वर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और देश के सबसे प्रिय मंदिरों में गिना जाता है। पहली यात्रा तब सहज और अर्थपूर्ण होती है जब आपको कथा और मंदिर की कुछ सरल बातें पहले से पता हों।
### कथा एक अनुच्छेद में शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता में अवंती की कथा है; अवंती उज्जैन का पुराना नाम है। वहाँ वेदप्रिय नाम के भक्त ब्राह्मण और उनके चार पुत्र कठिन समय में भी पूजा करते रहे। जब नगर पर संकट आया, तो उन्होंने प्रार्थना की और शिव महाकाल के रूप में प्रकट होकर उनकी रक्षा के लिए आए। उनके अनुरोध पर वे वहीं बस गए। अध्याय 16 और 17 में एक और कथा है: राजा चंद्रसेन महाकाल के भक्त थे, और श्रीकर नाम के एक बालक ने राजा की पूजा देखकर एक पत्थर से अपना छोटा-सा मंदिर बना लिया। पुराण का भाव यह है कि श्रद्धा भव्यता से बड़ी है।
### "महाकाल" क्यों? *काल* का अर्थ समय भी है और मृत्यु भी; *महा* का अर्थ है बड़ा। महाकाल समय के ही स्वामी हैं, जिनके सामने हर क्षण बीतता है। बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची वाले परंपरागत द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में इस स्थान का नाम एक पंक्ति में आता है: "उज्जयिन्यां महाकालम्"। प्राचीन श्लोक "अयोध्या मथुरा माया काशी काञ्ची अवन्तिका..." में सात पवित्र नगरियाँ गिनाई गई हैं, जिनमें अवन्तिका उज्जैन है। कालिदास ने मेघदूत में उज्जयिनी और महाकाल की संध्या-पूजा का वर्णन किया है।
### दक्षिणमुखी का अर्थ महाकालेश्वर का लिंग *दक्षिणमुखी* बताया जाता है, यानी दक्षिण की ओर मुख वाला। बहुत से भक्त इसे महाकाल के काल-स्वामी रूप से जोड़ते हैं। इसमें कुछ अलग खोजने की ज़रूरत नहीं; यह एक नाम है जो आप सुनेंगे, और अब आप उसका अर्थ जानते हैं।
### भस्म आरती भस्म आरती सुबह-सुबह होने वाली वह आरती है जिसके लिए मंदिर विशेष रूप से जाना जाता है। उसमें प्रवेश की व्यवस्था श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अपने आधिकारिक माध्यमों से पहले से होती है। नियम, समय और व्यवस्थाएँ बदलती रहती हैं, इसलिए यात्रा से पहले समिति के प्रकाशित पन्नों (mahakaleshwar.nic.in) पर पढ़ें, और उन माध्यमों के बाहर किसी को पैसे न दें।
### वस्त्र और व्यवहार समिति गर्भगृह में प्रवेश के लिए वस्त्र-नियम प्रकाशित करती है, और कुछ आरतियों के अपने नियम हैं। किसी के कहे पर निर्भर रहने के बजाय ताज़ा सूचना देखें। फिर भी शालीन कपड़े, आसानी से उतरने वाले जूते-चप्पल और कतार में धैर्य साथ रखें। बहुत से मंदिरों में मोबाइल और थैलों पर रोक होती है, इसलिए प्रवेश-द्वार पर पूछ लें।
### नागचंद्रेश्वर नागचंद्रेश्वर का मंदिर वर्ष में केवल एक बार, नाग पंचमी को भक्तों के लिए खुलता है। किसी और दिन जाएँ तो वह बंद मिलेगा, और यही नियम है।
### भवन के बारे में एक बात आज का मंदिर 18वीं शताब्दी में फिर से बनवाया गया। ब्योरा समिति के प्रकाशित इतिहास में मिलेगा; भक्तों की स्मृति में यह स्थान उससे कहीं पुराना है।
### अभ्यास एक छोटा नियम चुनें जो आप सात दिन तक रोज़ एक ही समय पर निभा सकें, जैसे सुबह दो मिनट बैठना और धीरे से "ॐ नमः शिवाय" कहना। महाकाल समय के स्वामी हैं, इसलिए तय समय पर नियम निभाना उनके नाम का सम्मान है।
**स्रोत:** शिव पुराण, कोटिरुद्र संहिता (महाकाल के अध्याय; राजा चंद्रसेन और बालक श्रीकर, अध्याय 16-17), गीता प्रेस, गोरखपुर; द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र ("उज्जयिन्यां महाकालम्"); कालिदास, मेघदूत (पूर्वमेघ), एम. आर. काले संस्करण; सात पवित्र नगरियों का परंपरागत श्लोक (प्रायः गरुड़ पुराण से उद्धृत); श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, प्रकाशित इतिहास और आरती-सारणी (mahakaleshwar.nic.in)।