गणेश जी और फल

Episode 2 of 2 in भारत की सोने से पहले की कहानियाँ.

Narrated with an AI voice.

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4 min
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4 min
By
DharmikStudio Originals
Narration
AI voice

In this episode

  • पार्वती जी ने एक फल के लिए संसार का चक्कर लगाने की शर्त रखी।
  • गणेश जी ने संसार की जगह माता-पिता की परिक्रमा की।
  • गणेश जी ने अपना आधा फल अपने भाई को दे दिया।

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*[Sound: शांत रात, हल्की हवा, बहुत धीमी पवन-घंटी। 4 सेकंड।]*

नमस्ते, छोटे से प्यारे। कंबल ओढ़ लिया? अपनी बाँहों को भारी होने दो, अपने पैरों को भी भारी होने दो। चलो, साथ में एक धीमी साँस लेते हैं। अंदर... और बाहर।

**

बर्फ़ से ढके एक शांत पहाड़ पर एक प्यारा सा परिवार रहता था। पिता थे **शिव जी**, शांत और स्थिर। माँ थीं **पार्वती जी**, कोमल और दयालु। और थे उनके दो बेटे।

बड़े थे **कार्तिकेय**। तेज़ और साहसी, और वे एक सुंदर मोर पर चलते थे, जिसके पंख नीले और हरे रंग में चमकते थे।

छोटे थे **गणेश जी**। बड़ी-बड़ी प्यारी आँखें, पंखे जैसे मुलायम कान, और गोल-मटोल ख़ुश पेट। और वे एक नन्हे चूहे पर चलते थे, जो उनका सबसे अच्छा दोस्त था।

**

एक दिन **नारद जी** मिलने आए। उनके हाथ में एक फल था, सुनहरा और चमकता हुआ। परंपरा कहती है कि वह ज्ञान का फल था, और ऐसा फल बस एक ही था।

दोनों भाइयों ने उसे देखा। "अरे," कार्तिकेय बोले। "अरे," गणेश जी बोले। दोनों को वह फल चाहिए था।

पार्वती जी मुस्कुराईं। शिव जी मुस्कुराए। "चलो एक खेल खेलते हैं," पार्वती जी ने कहा। "जो पूरे संसार का चक्कर लगाकर सबसे पहले लौटेगा, फल उसी का।"

**

कार्तिकेय ने एक पल भी इंतज़ार नहीं किया। वे कूदकर मोर पर बैठ गए। सर्र! मोर ने पंख फैलाए, और वे ऊपर, ऊपर उड़ चले, पहाड़ों के ऊपर, नदियों के ऊपर, चौड़े नीले समुद्रों के ऊपर।

गणेश जी ने अपने नन्हे चूहे को देखा। चूहे ने गणेश जी को देखा। चूहे ने अपनी मूँछें हिलाईं, जैसे कह रहा हो, "दोस्त, संसार तो बहुत बड़ा है।"

गणेश जी बैठ गए और सोचने लगे। बहुत चुपचाप, जैसे तुम आँखें बंद करके सोचते हो।

**

फिर वे उठे। हाथ जोड़े। और धीरे-धीरे, अपने नन्हे चूहे के साथ, माँ और पिता के चारों ओर गोल-गोल चले। एक बार। दो बार। तीन बार।

फिर उन्होंने उन्हें प्रणाम किया।

"गणेश," पार्वती जी ने प्यार से पूछा, "तुमने हमारी परिक्रमा क्यों की?"

गणेश जी मुस्कुराए। "क्योंकि आप ही मेरा पूरा संसार हैं, माँ। आप और बाबा। जो कुछ मुझे प्यारा है, सब यहीं है।"

शिव जी और पार्वती जी ने एक-दूसरे को देखा, और उनकी आँखें ख़ुशी से भर आईं। उन्होंने गणेश जी को गले से लगा लिया। और सुनहरा फल उन्हें दे दिया।

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थोड़ी देर बाद पंखों की फड़फड़ाहट सुनाई दी। कार्तिकेय लौट आए थे! वे पूरे संसार का चक्कर लगाकर आए थे, और उनकी आँखें चमक रही थीं।

शिव जी और पार्वती जी ने उन्हें भी गले लगाया। "तुम कितने तेज़ और कितने साहसी हो," शिव जी ने कहा। "तुमने पूरा संसार देखा है। हमारे पास बैठो, और बताओ तुमने क्या-क्या देखा।"

तो कार्तिकेय ने उन्हें पहाड़ों, नदियों और समुद्रों के बारे में बताया, ऊँचे पेड़ों और नन्हे फूलों के बारे में, और पानी में चमकती मछलियों के बारे में। गणेश जी अपने बड़े कानों से हर बात प्यार से सुनते रहे।

**

और गणेश जी? उन्होंने अपने हाथ में सुनहरे फल को देखा। फिर उसके दो टुकड़े किए, और आधा अपने भाई को दे दिया।

"ये आपके लिए, भैया," उन्होंने कहा। "आप तो पूरे संसार का चक्कर लगाकर आए हैं।"

कार्तिकेय हँस पड़े और छोटे भाई को गले लगा लिया। और पूरा परिवार उस शांत पहाड़ पर, तारों के नीचे, साथ बैठा रहा, बहुत ख़ुश।

**

कुछ लोग संसार देखने बहुत दूर जाते हैं। कुछ लोग अपने प्यारों में ही पूरा संसार देख लेते हैं। दोनों अच्छे हैं, छोटे से प्यारे।

तुम्हारा पूरा संसार कौन है?

जवाब देने की ज़रूरत नहीं। बस आँखें बंद करते हुए उन्हें याद करो।

शुभ रात्रि। मीठी नींद सोना। कोई जो तुमसे बहुत प्यार करता है, बिल्कुल पास है।

**

यह कथन AI आवाज़ में है। कहानी बच्चों के लिए DharmikStudio टीम ने अपने शब्दों में कही है।

*[Sound: धीमी पवन-घंटी, धीमे और धीमे। धीरे से समाप्त।]*

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