जगन्नाथ: पुरी के जगत के नाथ जगन्नाथ पुरी, एपिसोड 1: राजा इंद्रद्युम्न और पवित्र दारु

पुरी के जगन्नाथ की पाँच कथाएँ, स्कन्द पुराण और ओड़िया परंपरा के सहारे। पहली कथा राजा इंद्रद्युम्न, वन के एक मुखिया और समुद्र से आई पवित्र दारु की है। फिर रथ…

Narrated with an AI voice.

By
DharmikStudio Originals
Language
Hindi
Length
1 h 2 min
Category
History, heritage & culture › Temples
Temple or tirtha
Jagannath Temple, Puri
Narration
AI voice

Episodes and lessons

  1. राजा इंद्रद्युम्न और पवित्र दारु Episode 1 · 12 min · Read along

    In this episode: राजा इंद्रद्युम्न ने नील माधव की खोज की और पवित्र दारु प्राप्त की।; ओड़िया कथा में विद्यापति और सबर समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण है।; देवों की मूर्तियाँ बिना हाथ-पैर के बनीं, जिसे कोई कमी नहीं माना गया।.

    It begins: "एक साँस के लिए शांत बैठ जाइए। भीतर। और बाहर।"

  2. रथ यात्रा और रथों पर विराजे तीनों देव Episode 2 · 12 min · Read along

    In this episode: रथ यात्रा में प्रभु अपने घर से बाहर सड़क पर आते हैं।; दइतापति परिवार बीमार देवों की सेवा करते हैं।; राजा भगवान के रथों को झाड़ू लगाते हैं।.

    It begins: "फिर से स्वागत है। एक साँस लीजिए, और दिन के शोर को थम जाने दीजिए।"

  3. नबकलेबर, प्रभु की नई देह Episode 3 · 12 min · Read along

    In this episode: प्रभु पुरानी देह से नई देह में आते हैं।; दइतापति वन की यात्रा करके विशेष नीम के वृक्ष खोजते हैं।; रात में पवित्र तत्व का परिवर्तन होता है।.

    It begins: "आइए, साथ मिलकर एक शांत साँस से शुरुआत करें। भीतर। और बाहर।"

  4. महाप्रसाद, मंदिर की रसोई और एक साथ बँटा भोजन Episode 4 · 12 min · Read along

    In this episode: मंदिर की रसोई में लकड़ी की आग पर मिट्टी के बर्तनों में महाप्रसाद पकाया जाता है।; जगन्नाथ को भोग लगाने के बाद देवी बिमला को प्रसाद चढ़ता है।; आनंद बाज़ार में सब लोग एक साथ मिलकर एक ही भोजन खाते हैं।.

    It begins: "आइए, साथ बैठकर एक साँस लें। भीतर। और बाहर।"

  5. पुरी के कवि और संत, गीत गोविंद से चैतन्य तक Episode 5 · 13 min · Read along

    In this episode: जयदेव के गीत गोविंद ने पुरी की कला और संगीत को गहराई से आकार दिया।; चैतन्य महाप्रभु ने पुरी आकर जगन्नाथ के प्रति अपना गहरा प्रेम दिखाया।; सालबेग जैसे अलग-अलग पृष्ठभूमियों के कवियों ने भी जगन्नाथ को प्रेम से याद किया।.

    It begins: "जगन्नाथ पर इस कथा-माला की यह आख़िरी बैठक है। आइए, साथ मिलकर एक शांत साँस लें।"

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