अंजना का लाल

Episode 1 of 2 in बाल हनुमान की कहानियाँ.

Narrated with an AI voice.

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3 min
Listening time
3 min
By
DharmikStudio Originals
Narration
AI voice

In this episode

  • हनुमान ने अपनी माँ अंजना के साथ वन में खेलते हुए दयालुता सीखी।
  • उन्होंने एक नन्ही चिड़िया को बचाकर उसके घोंसले में सुरक्षित पहुँचाया।
  • माँ ने हनुमान को बलवान होने से ज़्यादा दयालु होने पर गर्व महसूस कराया।

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*[Sound: सुबह का शांत वन, चिड़ियों की धीमी चहचहाहट, पत्तों की सरसराहट। 4 सेकंड।]*

नमस्ते, छोटे दोस्त। आराम से बैठ गए? चलो, एक वन में चलते हैं, बहुत दूर, बहुत पहले।

**

उस वन में **अंजना** नाम की एक माँ रहती थीं। और उनके साथ रहता था उनका नन्हा लाल, **हनुमान**। बहुत से घरों में कहते हैं कि वे पवन देव के भी बेटे थे, इसलिए उन्हें हवा बहुत अच्छी लगती थी।

नन्हे हनुमान की आँखें चमकीली थीं। उनकी लंबी सी पूँछ थी, जो आख़िर में गोल मुड़ जाती थी। और उनमें इतनी फुर्ती थी कि वे एक मिनट भी चुप नहीं बैठ सकते थे।

हर सुबह सूरज निकलते ही वे आँखें खोलते और कहते, "माँ! माँ! मैं खेलने जाऊँ?"

और अंजना हँसकर कहतीं, "हाँ, मेरे लाल। पर वहीं रहना जहाँ मैं तुम्हें देख सकूँ।"

**

हनुमान दौड़कर बड़े बरगद के पेड़ के पास गए। एक डाल से दूसरी डाल पर झूले। सर्र! फिर कूदकर मुलायम घास पर आ गए।

उन्होंने आसमान की ओर देखा। "माँ," उन्होंने पुकारा, "बादल कैसे तैरते हैं? क्या वे रुई के बने हैं?"

अंजना उनके पास बैठ गईं। "वे पानी की नन्ही बूँदों से बने हैं," उन्होंने कहा, "इतनी हल्की कि हवा उन्हें उठा ले जाती है।"

"हवा!" हनुमान बोले। "मुझे हवा बहुत अच्छी लगती है।"

फिर उन्होंने नीचे देखा। छोटी चींटियों की एक लाइन पत्थर पर चल रही थी। "माँ, ये कहाँ जा रही हैं?"

"घर," अंजना ने कहा। "अपने परिवार के लिए खाना ले जा रही हैं।"

हनुमान पेट के बल लेटकर उन्हें देखते रहे। उन्होंने ध्यान रखा कि एक भी चींटी पर पैर न पड़े। "नमस्ते, चींटियो," उन्होंने धीरे से कहा। "घर तक अच्छे से जाना।"

**

तभी उन्हें एक नन्ही सी आवाज़ सुनाई दी। चीं। चीं।

एक झाड़ी के नीचे एक नन्ही चिड़िया बैठी थी। वह फुदककर घोंसले से बाहर आ गई थी और वापस ऊपर नहीं उड़ पा रही थी। वह उस डाल की ओर देख रही थी जहाँ उसकी माँ राह देख रही थी।

हनुमान ने उसे झपटकर नहीं पकड़ा। वे चिल्लाए भी नहीं। वे बहुत, बहुत धीरे से घुटनों पर बैठ गए।

"चिंता मत करो, नन्ही," उन्होंने धीरे से कहा। "मैं तुम्हारी मदद करूँगा।"

उन्होंने चिड़िया को अपनी दोनों मुलायम हथेलियों में रखा। धीरे-धीरे पेड़ पर चढ़े, और उसे उसके घोंसले में रख दिया। माँ चिड़िया ने ख़ुशी का गीत गाया, और नन्ही चिड़िया उसके मुलायम पंख के नीचे छिप गई।

**

नीचे आते हुए हनुमान को एक गिलहरी मिली। उसके हाथ में ख़ाली छिलका था। वह भूखी लग रही थी। हनुमान के हाथ में एक मीठा फल था। उन्होंने उसके दो टुकड़े किए, और बड़ा टुकड़ा गिलहरी को दे दिया।

जब वे दौड़कर माँ के पास लौटे, तो अंजना ने उन्हें कसकर गले लगा लिया।

"तुम बहुत बलवान हो, मेरे लाल," उन्होंने कहा। "पर जानते हो मुझे सबसे ज़्यादा ख़ुशी किस बात से होती है? तुम दयालु हो।"

**

अगर वह नन्ही चिड़िया तुम्हें मिलती, तो तुम क्या करते?

**

यह कथन AI आवाज़ में है। कहानी बच्चों के लिए DharmikStudio टीम ने अपने शब्दों में कही है।

*[Sound: चिड़ियों की धीमी चहचहाहट। धीरे से समाप्त।]*

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