भूली हुई ताक़त
Episode 2 of 2 in बाल हनुमान की कहानियाँ.
Narrated with an AI voice.
- Reading time
- 3 min
- Listening time
- 3 min
- By
- DharmikStudio Originals
- Narration
- AI voice
In this episode
- हनुमान ने अपनी असली ताकत को भूल गए थे।
- जाम्बवान ने उन्हें उनकी ताकत की याद दिलाई।
- दोस्तों की मदद से हनुमान ने फिर से हिम्मत पाई।
Read along
*[Sound: समुद्र किनारे धीमी लहरें, हल्की हवा। 4 सेकंड।]*
फिर से नमस्ते, छोटे दोस्त। याद है नन्हे हनुमान, जिन्होंने नन्ही चिड़िया की मदद की थी? अब वे बड़े हो गए हैं। आज वे समुद्र के किनारे बैठे हैं।
**
उनके सामने समुद्र है। चौड़ा और नीला, दूर तक फैला हुआ, आसमान तक।
हनुमान के साथ बहुत से दोस्त हैं, बंदरों की एक बड़ी टोली, और एक बूढ़े, समझदार भालू, जिनका नाम है **जाम्बवान**।
वे सब राम जी की मदद करने आए हैं। राम जी की प्यारी पत्नी **सीता जी** बहुत दूर हैं, इस समुद्र के उस पार। राम जी को उनकी बहुत याद आती है। वे चाहते हैं कि कोई उस पार जाकर सीता जी से कहे, "राम आपसे प्रेम करते हैं, और वे आ रहे हैं।"
पर इतना बड़ा समुद्र कोई पार कैसे करेगा? न कोई पुल है, न इतनी बड़ी नाव। बस पानी है, आसमान है, और बहुत दूर का किनारा।
**
बंदर मुलायम रेत पर बैठे और बातें करने लगे।
एक ने कहा, "मैं थोड़ी दूर कूद सकता हूँ, पर इतनी दूर नहीं।"
दूसरे ने कहा, "मैं थोड़ा और कूद सकता हूँ। पर पूरा नहीं।"
युवराज **अंगद** ने भी कहा, "मुझे लगता है मैं वहाँ पहुँच जाऊँगा। पर लौट पाऊँगा या नहीं, पता नहीं।"
सब चुप हो गए। लहरें करती रहीं, छप, छप।
**
और हनुमान? वे बाक़ी सबसे थोड़ा दूर बैठे समुद्र को देख रहे थे। कुछ बोल नहीं रहे थे।
बात यह थी कि हनुमान कुछ भूल गए थे। वे भूल गए थे कि वे कितने बलवान हैं। उन्हें लगता था कि वे भी बाक़ी सबकी तरह ही हैं।
**
बूढ़े जाम्बवान ने उन्हें देखा। वे धीरे-धीरे उनके पास आए, और बगल में बैठ गए।
"हनुमान," उन्होंने प्यार से कहा, "तुम इतने चुप क्यों हो?"
हनुमान ने कंधे उचकाए। "मैं क्या कर सकता हूँ?"
जाम्बवान मुस्कुराए। "मैं तुम्हें तुम्हारे बारे में कुछ बताता हूँ। जब तुम छोटे थे, तुम हवा जितने तेज़ थे। तुम पवन के बेटे हो, हनुमान। तुम साहसी हो, समझदार हो, और दयालु हो। तुम हमेशा से बलवान हो। बस भूल गए थे। और देखो, कितने दोस्त यहाँ हैं, सब आस लगाए कि तुम्हें याद आ जाए।"
**
हनुमान ने सुना। सोचा। और धीरे-धीरे उनके मन में कुछ चमकने लगा, जैसे कोई दीया जल रहा हो।
वे उठ खड़े हुए। गहरी साँस ली। उन्हें लगा कि वे बड़े हो रहे हैं, और बड़े, पहाड़ जितने ऊँचे। परंपरा कहती है कि वे सचमुच वहीं किनारे पर बहुत बड़े हो गए थे।
"हाँ," हनुमान बोले। "मैं कर सकता हूँ। मैं राम जी का संदेश सीता जी तक ले जाऊँगा।"
सारे दोस्त ख़ुशी से उछल पड़े। बूढ़े भालू ने सिर हिलाया और मुस्कुराए। हनुमान ने धीरे से कहा, "याद दिलाने के लिए धन्यवाद।"
**
कभी-कभी हम भूल जाते हैं कि हम कितना कुछ कर सकते हैं। और कभी-कभी कोई दोस्त हमें याद दिलाता है। तुम्हें कौन याद दिलाता है कि तुम बलवान हो?
**
यह कथन AI आवाज़ में है। कहानी बच्चों के लिए रामायण से DharmikStudio टीम ने अपने शब्दों में कही है।
*[Sound: धीमी लहरें। धीरे से समाप्त।]*