रमा एकादशी की कथा
Episode 1 of 4 in कार्तिक की कथाएँ: दीयों के महीने की कहानियाँ.
Narrated with an AI voice.
- Reading time
- 2 min
- Listening time
- 2 min
- By
- DharmikStudio Originals
- Narration
- AI voice
In this episode
- रमा एकादशी गुरुवार 5 नवंबर को है, दिवाली से ठीक पहले।
- चंद्रभागा शोभन को सच बताती है कि व्रत कठिन होगा।
- उसकी बरसों की शांत एकादशी से पर्वत का नगर स्थिर होता है।
Read along
नमस्ते। कार्तिक की कथाओं में आपका स्वागत है। आज कथा है रमा एकादशी की, जो दिवाली से ठीक पहले आती है। यह पद्म पुराण में आती है, जहाँ भगवान कृष्ण युधिष्ठिर को हर एकादशी का महत्व बताते हैं।
*[ठहराव]*
बहुत पहले मुचुकुंद नाम के एक सच्चे राजा थे। उनके राज्य में हर कोई एकादशी का व्रत रखता था। उनकी बेटी चंद्रभागा का विवाह शोभन से हुआ था, जो सरल स्वभाव के राजकुमार थे, पर शरीर से दुर्बल थे।
एक कार्तिक में शोभन एकादशी से ठीक पहले ससुराल आए। नगर में ढोल बजा: कल कोई भोजन नहीं करेगा। शोभन चिंतित हुए, और पत्नी से पूछा कि क्या करें। चंद्रभागा ने सच नहीं छिपाया। उसने कहा, यहाँ एकादशी को कोई भोजन नहीं करता। अगर आप उपवास नहीं कर सकते, तो उस दिन से पहले घर लौट जाना अच्छा है।
शोभन ने रुककर व्रत रखने का निश्चय किया। वह दिन उनके लिए बहुत लंबा था, और अगली सुबह तक उनका देहांत हो गया। चंद्रभागा पिता के घर ही रही, और हर एकादशी का व्रत रखती रही।
*[ठहराव]*
व्रत के पुण्य से शोभन को मंदराचल पर्वत पर एक जगमगाता नगर मिला। पर वह नगर स्थिर नहीं था, क्योंकि उन्होंने व्रत केवल कर्तव्य से रखा था, श्रद्धा से नहीं। सोमशर्मा नाम के एक ब्राह्मण तीर्थयात्रा में उनसे मिले, और यह समाचार घर ले आए।
चंद्रभागा वामदेव ऋषि की सहायता से पर्वत पर पहुँची। उसने शोभन से कहा कि वह आठ वर्ष की आयु से एकादशी रखती आई है, और उसने उन सभी व्रतों का पुण्य उन्हें दे दिया। नगर स्थिर हो गया, और दोनों वहाँ साथ रहने लगे।
*[ठहराव]*
बड़े अक्सर कहते हैं कि यह बरसों तक चुपचाप निभाई गई श्रद्धा की कथा है। और एक बात, जो ज़रूरी है: कोई भी अपनी शक्ति से बाहर उपवास न करे। अस्वस्थ हों, गर्भवती हों, मधुमेह हो या दवा लेते हों, तो पहले डॉक्टर से बात करें। फल और दूध भी परंपरा का हिस्सा हैं।
रमा एकादशी गुरुवार 5 नवंबर को है। अगली सुबह पारण का समय अपने पंचांग में देख लें। नमस्ते।