यशोदा मैया और रस्सी

Episode 2 of 4 in कार्तिक की कथाएँ: दीयों के महीने की कहानियाँ.

Narrated with an AI voice.

Reading time
2 min
Listening time
2 min
By
DharmikStudio Originals
Narration
AI voice

In this episode

  • बहुत से वैष्णव घरों में कार्तिक को दामोदर मास कहते हैं।
  • यशोदा मैया की हर रस्सी दो उँगल छोटी निकलती है।
  • दामोदर यानी वे जिनकी कमर माँ के प्रेम से बँधी।

Read along

नमस्ते, कार्तिक की कथाओं में फिर से स्वागत है। बहुत से वैष्णव घरों में कार्तिक का एक और नाम है: दामोदर मास। हर शाम बाल कृष्ण के आगे दीया घुमाया जाता है, और दामोदराष्टक गाया जाता है। आज रात उस नाम के पीछे की कथा। यह श्रीमद्भागवत के दसवें स्कंध के नौवें अध्याय में है।

*[ठहराव]*

गोकुल में एक सुबह यशोदा मैया दही मथ रही थीं, और काम करते हुए अपने लाला के गीत गा रही थीं। नन्हे कृष्ण भूखे आए और उनकी गोद में चढ़ गए। मैया ने उन्हें दूध पिलाया। तभी चूल्हे पर दूध उफनने की गंध आई, उन्होंने लाला को नीचे बिठाया और जल्दी से चली गईं।

कृष्ण को नीचे बिठाया जाना अच्छा नहीं लगा। दही की मटकी फूट गई, और वे भंडार में जाकर ताज़ा माखन ले आए, और खिड़की पर बैठे बंदरों के साथ बाँटने लगे।

*[ठहराव]*

यशोदा मैया लौटीं और सब देखा। कृष्ण ने उन्हें आते देखा और भागे। मैया उनके पीछे गोल-गोल दौड़ीं, और आख़िर उनका नन्हा हाथ पकड़ लिया। वे रो रहे थे, आँखें मल रहे थे, और मैया का मन पिघल गया। उन्होंने सोचा कि बस उन्हें ऊखल से बाँध दें, ताकि वे काम करते समय एक जगह रहें।

उन्होंने रस्सी ली। वह दो उँगल छोटी निकली। दूसरी जोड़ी। फिर भी दो उँगल छोटी। घर की सारी रस्सियाँ ले आईं, और हर बार दो उँगल कम। गोकुल की गोपियाँ इकट्ठी होकर आश्चर्य से हँसने लगीं।

मैया अब थक गई थीं, उनके बाल खुलने लगे थे। माँ को इतना थका देखकर कृष्ण ने स्वयं को बँध जाने दिया।

*[ठहराव]*

यही है वह नाम। दाम यानी रस्सी, उदर यानी पेट। दामोदर, वे जिनकी कमर माँ के प्रेम की रस्सी से बँधी। भागवत कहता है कि जिन भगवान को बड़े-बड़े ऋषि भी नहीं पकड़ पाते, उन्हें यशोदा मैया के प्रेम ने बाँध लिया।

चाहें तो आज शाम एक दीया जलाकर बाल कृष्ण के चित्र के आगे धीरे से घुमाइए। नमस्ते।

Keep going