बैठना और साँस
Episode 1 of 1 in श्वास और जप.
Narrated with an AI voice.
- Reading time
- 5 min
- Listening time
- 5 min
- By
- DharmikStudio Originals
- Narration
- AI voice
In this episode
- साँस लेने के तरीके में कोई बदलाव नहीं करना है, बस उसे देखना है।
- बैठने के लिए ज़मीन या कुर्सी का इस्तेमाल करें, शरीर को सीधा और सहज रखें।
- साँस छोड़ते समय एक से दस तक गिनती गिनें, मन भटके तो वापस आएं।
Read along
*[Sound: सुबह का समय, कुछ पक्षी, कमरे की हल्की आवाज़। 4 सेकंड।]*
नमस्ते, और श्वास और जप में आपका स्वागत है। यह सात में से पहला पाठ है।
शुरू करने से पहले एक व्यावहारिक बात। अगर आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है, आप गर्भवती हैं, या किसी बीमारी से उबर रहे हैं, तो साँस के अभ्यास शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से पूछ लीजिए। इस पाठ में हम साँस के साथ कुछ अलग नहीं करेंगे। हम बस उसे देखेंगे। फिर भी, आपका शरीर सबसे अच्छा जानता है। कुछ असहज लगे तो रुक जाइए, और बस आराम कीजिए।
आज की बात दो चीज़ों की है: कैसे बैठें, और उस साँस को कैसे देखें जो पहले से आपके पास है। आगे के पाठों में माला आएगी, और आपका अपना मंत्र, जो आप पहले से जपते हैं, या जो आपके परिवार या गुरु ने दिया है। आज नहीं। आज बस बैठना।
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**कहाँ बैठें।** ऐसी जगह चुनिए जो थोड़ी शांत हो, जहाँ कुछ मिनट कोई आपको न बुलाए। पूजा घर होना ज़रूरी नहीं। सोने के कमरे का एक कोना भी ठीक है। बालकनी भी।
**कैसे बैठें।** आपके पास दो अच्छे तरीके हैं।
ज़मीन पर: एक कंबल मोड़ लीजिए या एक मज़बूत गद्दी लीजिए, और उसके आगे वाले किनारे पर बैठिए, ताकि कूल्हे घुटनों से थोड़े ऊँचे रहें। पैरों को जैसे आराम लगे वैसे मोड़ लीजिए। सबसे कठिन आसन के लिए कोई इनाम नहीं है।
कुर्सी पर: कुर्सी के आगे वाले हिस्से में बैठिए, ताकि पीठ पीछे टिकी न रहे। दोनों पैर ज़मीन पर सपाट रखिए, थोड़ा फ़ासला देकर। पैर ज़मीन तक न पहुँचें तो उनके नीचे एक किताब या मुड़ा हुआ कपड़ा रख लीजिए। कुर्सी पर बैठना भी पूरा और सही तरीका है। बहुत से बुज़ुर्ग ऐसे ही बैठते हैं, और आप भी बैठ सकते हैं।
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**रीढ़।** अब रीढ़ को धीरे से ऊपर उठने दीजिए, जैसे सिर के ऊपर बँधा एक धागा आपको छत की ओर थोड़ा खींच रहा हो। सीधे, पर अकड़े हुए नहीं। कंधों को कानों से दूर, नीचे ढीला छोड़ दीजिए। हाथ जाँघों पर या गोद में रखिए, हथेलियाँ नीचे या ऊपर, जैसे सहज लगे। ठोड़ी को बस ज़रा-सा अंदर कीजिए, ताकि गर्दन का पिछला हिस्सा लंबा रहे।
स्थिर, और सहज। आसन के लिए बस यही दो शब्द काफ़ी हैं।
**आँखें।** आँखें धीरे से बंद कर सकते हैं। या, अगर बंद करना अजीब लगे, तो आधी खुली रखिए, और नज़र को सामने लगभग एक मीटर दूर ज़मीन पर टिकने दीजिए, बिना किसी चीज़ को देखे। दोनों ही सही हैं। आँखों के आसपास और माथे को ढीला होने दीजिए।
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**साँस।** अब, कुछ भी बदले बिना, ध्यान दीजिए कि आप साँस ले रहे हैं। आराम लगे तो नाक से साँस लीजिए। साँस को लंबा या गहरा मत कीजिए। रोकिए भी नहीं। बस उसे देखिए, जैसे किनारे बैठकर नदी को देखते हैं।
देखिए कि वह सबसे ज़्यादा कहाँ महसूस होती है। शायद नाक पर ठंडी हवा में। शायद पेट के उठने और बैठने में।
अब एक सरल गिनती जोड़ते हैं। हर बार साँस छोड़ते समय मन में चुपचाप एक संख्या गिनिए। साँस अंदर। साँस बाहर, एक। साँस अंदर। साँस बाहर, दो। दस तक। फिर एक से दोबारा शुरू।
गिनती भूल जाएँ, और भूलेंगे ही, तो यह ग़लती नहीं है। यही अभ्यास है। देखिए कि मन भटक गया, उस पर हल्का-सा मुस्कुराइए, और फिर एक से शुरू कीजिए। भटकना और लौटना, भटकना और लौटना: ध्यान ऐसे ही, बहुत धीरे-धीरे, सधता है।
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अब हम साथ बैठते हैं, लगभग नब्बे सेकंड। मैं चुप रहूँगी। आपको बस थोड़ा-सा संगीत सुनाई देगा। सीधे और सहज बैठिए, आँखें आराम में, और हर बाहर जाती साँस को एक से दस तक गिनिए। समय पूरा होने पर मैं फिर बोलूँगी।
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अब धीरे से गिनती छोड़ दीजिए।
**कैसे पूरा करें।** एक थोड़ी भरी हुई साँस अंदर लीजिए, और धीरे से छोड़िए। उँगलियाँ और पैर की उँगलियाँ हिलाइए। आँखें बंद थीं तो धीरे से खोलिए, पहले किसी पास की चीज़ को देखिए, फिर किसी दूर की चीज़ को। ज़मीन पर बैठे थे तो खड़े होने से पहले पैर खोलिए और एक पल के लिए फैला लीजिए। धीरे से उठिए।
देखिए कि अभी कैसा लग रहा है, बिना कोई राय बनाए। शांत, बेचैन, नींद-सी, या बिलकुल सामान्य: सब ठीक है। आप बैठे। यही पूरा पाठ है।
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अगले पाठ तक, इसे दिन में एक बार कीजिए। दो-तीन मिनट काफ़ी हैं। एक ही जगह और एक ही समय मदद करते हैं, पर ये नियम नहीं हैं। दूसरे पाठ में हम माला जोड़ेंगे, और धीरे से आपका अपना मंत्र लाएँगे, आपकी अपनी आवाज़ में।
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यह कथन AI आवाज़ में है। पाठ एक शिक्षक की चरण-सूची पर आधारित है, DharmikStudio टीम ने लिखा है।
*[Sound: फिर से पक्षी, धीरे से। समाप्त।]*